यह एक प्रेरणादायक कहानी है — एक आम पृष्ठभूमि वाले छात्र की जो अपने सपनों को सच्चाई में बदल देता है।
यह कहानी है ड्रीमर्स के छात्र अविषेक दुबे की, जो गुवाहाटी (असम) से हैं और जिन्होंने CDS 1 2025 OTA Entry के ज़रिए देश की सेवा करने का सपना पूरा किया।
प्रारंभिक जीवन और परिवार
अविषेक का बचपन एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में बीता, जहाँ ईमानदारी, अनुशासन और सम्मान जैसी बातें बहुत मायने रखती थीं।
उनके पिता श्री परसुराम दुबे हमेशा मानते हैं कि मेहनत ही असली सफलता की कुंजी है।
उनकी माँ श्रीमती रिंकू दुबे ने हमेशा उन्हें विनम्र और केंद्रित रहने की सीख दी।
गुवाहाटी में रहते हुए, अविषेक अक्सर रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों पर वर्दी में सैनिकों को देखते थे। वहीं से उनके मन में एक सपना पनपा – “एक दिन वो भी वर्दी में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।”
इसके पश्चात अविषेक दुबे ने देहरादून में भारत की सर्वश्रेष्ठ डिफेंस अकादमी ड्रीमर्स एजु हब (Best CDS coaching institute in Dehradun) के बारे में जाना। उसके बाद वे देहरादून पहुँचे और वहीं से अपनी तैयारी प्रारंभ की। लंबी मेहनत और निरंतर अध्ययन के बाद अविषेक दुबे का चयन CDS 1 2025 की OTA Entry में हुआ।
कक्षा में वे बहुत विनम्र और अनुशासित छात्र थे। वे हमेशा लगन और समर्पण के साथ मेहनत करते रहे, और यही उनका चयन होने का मुख्य कारण बना।
CDS की दिशा में कदम
अविषेक जानते थे कि CDS परीक्षा सिर्फ जानकारी की नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, मानसिक मजबूती और फिटनेस की भी परीक्षा है।
उन्हें खास तौर पर Officers’ Training Academy (OTA) की ओर आकर्षण था, जहाँ देशभर के युवा नेता बनना सीखते हैं और बाद में सैनिकों का नेतृत्व करते हैं।
असम से होने के नाते वो यह दिखाना चाहते थे कि पूर्वोत्तर भारत के छात्र भी मेहनत और सही मार्गदर्शन से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आसानी से पास कर सकते हैं।
परीक्षा और SSB प्रक्रिया समझना
उन्होंने सबसे पहले पूरी प्रक्रिया को अच्छी तरह समझा।
- CDS 1 2025 OTA में दो पेपर होते हैं – अंग्रेज़ी और सामान्य ज्ञान।
- लिखित परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों को SSB के लिए बुलाया जाता है।
- अविषेक को 18 SSB प्रयागराज केंद्र आवंटित हुआ।
- SSB इंटरव्यू पाँच दिनों का होता है, जिसमें स्क्रीनिंग, मनोवैज्ञानिक परीक्षण, समूह कार्य, साक्षात्कार और कॉन्फ्रेंस शामिल होते हैं।
सारी प्रक्रिया को समझने के बाद उन्होंने एक ठोस योजना बनाई – सिर्फ लिखित परीक्षा पर नहीं, बल्कि अपनी व्यक्तित्व, बोलचाल और फिटनेस पर भी काम किया।
SSB से जुड़ी जितनी भी ट्रेनिंग होती थी, उनमें उनका प्रदर्शन हमेशा उत्कृष्ट रहता था।
वे हर गतिविधि में सक्रिय रूप से भाग लेते थे और अपने आत्मविश्वास व नेतृत्व क्षमता के ज़रिए सबका ध्यान आकर्षित करते थे।
उन्हें देखकर उनके साथी छात्र भी प्रेरित होते थे और उनके गुरुजन उनके समर्पण की प्रशंसा करते थे।
Dreamers Edu Hub / Doon Defence Dreamers से जुड़ना

उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट था Dreamers Edu Hub (Doon Defence Dreamers) से जुड़ना।
वहाँ उन्हें मिला:
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कॉन्सेप्ट बेस्ड क्लासेस (अंग्रेज़ी और सामान्य अध्ययन)
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रेगुलर टेस्ट और उत्तर लेखन अभ्यास
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डेली करेंट अफेयर्स चर्चा
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अनुशासित रूटीन और PT सत्र
संस्थान का माहौल पूरी तरह डिफेंस ओरिएंटेड था। अन्य विद्यार्थियों को मेहनत करता देख उनमें भी उत्साह बढ़ा। फैकल्टी ने हमेशा यही कहा – “लगातार ईमानदारी और मेहनत से CDS पास किया जा सकता है।”
तैयारी की रणनीति
अविषेक की तैयारी चार सरल हिस्सों में बंटी थी:
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बुनियाद मजबूत करना: अंग्रेज़ी ग्रामर और सामान्य ज्ञान के बेसिक टॉपिक जैसे इतिहास, राजनीति, भौगोलिक ज्ञान और डिफेंस अवेयरनेस पर ध्यान।
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दैनिक अध्ययन: रोज़ 6–7 घंटे केंद्रित अध्ययन, सोशल मीडिया से दूरी।
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मॉक टेस्ट और विश्लेषण: हर टेस्ट के बाद कमज़ोर क्षेत्रों पर काम।
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फिटनेस और जीवनशैली: सही खान-पान, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम।
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सकारात्मक सोच: खुद को लगातार प्रेरित रखना और मेंटर्स से मार्गदर्शन लेना।
लिखित परीक्षा और परिणाम
परीक्षा के दिन अविषेक आत्मविश्वास से केंद्र पर पहुँचे।
अंग्रेज़ी में उन्होंने कॉम्प्रिहेंशन व ग्रामर पर फोकस किया और GK में राजनीति, इतिहास, रक्षा, विज्ञान और करेंट अफेयर्स पर।
परिणाम आने पर उनका नाम सफलता सूची में था।
पिता ने गर्व से सबको बताया, माँ ने भगवान का धन्यवाद किया और अविषेक ने इसे “शुरुआत” माना, मंज़िल नहीं।
SSB प्रयागराज की ओर यात्रा (14–18 अक्टूबर)
कॉल लेटर मिलते ही उन्होंने खुद को पूरी तरह SSB की तैयारी में झोंक दिया।
Dreamers Edu Hub में उन्होंने सीखा:
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PP&DT की कहानी लेखन और narration
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समूह चर्चा व मॉक इंटरव्यू अभ्यास
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बॉडी लैंग्वेज, ड्रेस और आत्मविश्वास के गुर
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खुद के गुण-दोषों पर आत्मविश्लेषण
SSB प्रयागराज का अनुभव
SSB में पाँच दिन का अनुभव बेहद सीखने वाला रहा।
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पहला दिन (Screening): कहानी स्पष्ट और व्यवहारिक थी, चर्चा में शांत और तार्किक रहे, चयन हुआ।
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मनोवैज्ञानिक परीक्षण: उन्होंने दिल से लिखा, कुछ याद नहीं किया।
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ग्रुप टास्क: टीमवर्क दिखाया, सभी को प्रोत्साहित किया।
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इंटरव्यू: परिवार, पढ़ाई और करंट अफेयर्स पर आत्मविश्वास से उत्तर दिए।
कॉन्फ्रेंस के दिन जब उनका नाम रिकमेंडेड कैंडिडेट्स की सूची में आया, तो भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। उन्होंने 18 SSB प्रयागराज सफलतापूर्वक पार कर ली।
परिवार और गुरुजनों की भूमिका
माता-पिता ने हमेशा उनका साथ दिया।
पिता ने कभी जल्द पैसे वाले करियर का दबाव नहीं डाला, माँ ने घर की जिम्मेदारियाँ संभाल लीं ताकि बेटा मन लगाकर पढ़ सके।
संस्थान के गुरुओं ने उन्हें अपनी तरह ही समझा — डांटा भी, समझाया भी, और हर कदम पर साथ रहे।
अन्य अभ्यर्थियों के लिए संदेश
अविषेक कहते हैं, सफलता किसी शहर या स्कूल की वजह से नहीं, बल्कि मेहनत से मिलती है।
जरूरत है:
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परीक्षा और SSB प्रक्रिया की पूरी समझ।
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अंग्रेज़ी व GK की मजबूत पकड़।
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अभ्यास, फिटनेस व मानसिक संतुलन का मेल।
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सही मार्गदर्शन, सही संस्थान।
उनकी कहानी यह बताती है कि अगर लगन, अनुशासन और विश्वास साथ हो, तो कोई भी सपना सच हो सकता है।
कल जब वो Officers’ Training Academy में वर्दी पहनकर चलेंगे, तब बहुत से युवा उन्हें देखकर कहेंगे —
“अगर वो कर सकते हैं, तो हम भी कर सकते हैं।”




























